रविवार, 1 फ़रवरी 2026

IV RG I South-Eastern Plateau Region

 दक्षिणी–पूर्वी पठारी प्रदेश 

(South-Eastern Plateau Region) 

दक्षिणी–पूर्वी पठारी प्रदेश राजस्थान के प्रमुख भौतिक प्रदेशों में से एक है। इसे सामान्यतः हाड़ौती पठार भी कहा जाता है। यह प्रदेश भौगोलिक, भूवैज्ञानिक, जलवायु, कृषि तथा आर्थिक दृष्टि से राज्य में विशेष महत्व रखता है।

1. स्थिति एवं विस्तार

यह प्रदेश राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है।

इसके अंतर्गत मुख्यतः कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले आते हैं।

उत्तर में अरावली पर्वतमाला के अंतिम छोर, पूर्व में चंबल नदी की घाटी, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा पश्चिम में मालवा पठार से इसकी सीमाएँ मिलती हैं।

2. नामकरण

“हाड़ौती” नाम यहाँ शासक रहे हाड़ा चौहान राजपूतों के नाम पर पड़ा।

चूँकि यह प्रदेश राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक पठारी भाग है, इसलिए इसे दक्षिणी–पूर्वी पठारी प्रदेश कहा जाता है।

3. भूवैज्ञानिक संरचना

यह प्रदेश मुख्यतः प्राचीन आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों (बेसाल्ट, ग्रेनाइट) से निर्मित है।

मालवा पठार का ही एक विस्तारित भाग माना जाता है।

कहीं-कहीं पर लावा निर्मित काली मिट्टी (रेगुर) पाई जाती है।

4. स्थलाकृति (Relief)

यह क्षेत्र समतल से तरंगित पठार के रूप में विकसित है।

औसत ऊँचाई लगभग 300–600 मीटर है।

चंबल, कालीसिंध, पार्वती और परवन नदियों ने गहरी घाटियाँ एवं खाइयाँ बनाई हैं।

कुछ भागों में कगारदार ढालें (Escarpments) भी देखने को मिलती हैं।

5. जलवायु

यहाँ की जलवायु उष्ण एवं अर्ध-आर्द्र प्रकार की है।

राजस्थान के अन्य भागों की तुलना में यहाँ अधिक वर्षा (80–100 सेमी) होती है।

गर्मियों में तापमान अधिक, जबकि सर्दियों में हल्की ठंड रहती है।

6. मिट्टी

प्रमुख मिट्टियाँ:

काली कपास मिट्टी (रेगुर) – कपास, सोयाबीन, गेहूँ के लिए उपयुक्त

लाल-पीली मिट्टी – पठारी ढालों पर

मिट्टी सामान्यतः उपजाऊ होती है।

7. प्राकृतिक वनस्पति

यहाँ पर्णपाती वन पाए जाते हैं।

प्रमुख वृक्ष: सागौन, सालर, धाक, खैर, महुआ, अर्जुन आदि।

राजस्थान का यह क्षेत्र वन संसाधनों में अपेक्षाकृत समृद्ध है।

8. नदियाँ एवं अपवाह तंत्र

यह पूरा प्रदेश चंबल नदी तंत्र में आता है।

प्रमुख नदियाँ:

चंबल

कालीसिंध

पार्वती

परवन

ये नदियाँ गहरी घाटियाँ बनाते हुए बहती हैं, जिससे अपवाह व्यवस्था सुस्पष्ट है।

9. कृषि

यह राजस्थान का सबसे उपजाऊ कृषि प्रदेश माना जाता है।

प्रमुख फसलें:

खरीफ: सोयाबीन, मक्का, कपास

रबी: गेहूँ, चना, सरसों

सिंचाई के साधन:

नहरें (चंबल परियोजना)

कुएँ एवं नलकूप

10. खनिज एवं उद्योग

यहाँ कुछ खनिज संसाधन पाए जाते हैं:

चूना पत्थर

बलुआ पत्थर

कोटा औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर है:

सीमेंट उद्योग

उर्वरक उद्योग

विद्युत उत्पादन (कोटा थर्मल पावर स्टेशन)

11. जनसंख्या एवं मानव क्रियाएँ

उपजाऊ भूमि एवं पर्याप्त जल के कारण यहाँ घनी आबादी पाई जाती है।

कृषि मुख्य आजीविका है, साथ ही उद्योग और व्यापार का भी विकास हुआ है।

12. महत्त्व

राजस्थान का हरित एवं समृद्ध क्षेत्र

राज्य की कृषि एवं ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान

प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध

निष्कर्ष

दक्षिणी–पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती पठार) राजस्थान का वह भाग है जहाँ उपजाऊ मिट्टी, पर्याप्त वर्षा, विकसित नदी तंत्र और औद्योगिक गतिविधियाँ एक साथ देखने को मिलती हैं। इसलिए इसे राजस्थान का कृषि एवं आर्थिक रूप से सुदृढ़ क्षेत्र कहा जाता है।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

IV RG IV Meena Tribe

Topic: राजस्थान की जनजातीय जनसंख्या – वितरण एवं प्रमुख जनजाति “मीणा” (Meena Tribe) प्रस्तावना राजस्थान भारत का एक प्रमुख जनजातीय राज्य है। य...