वायुदाब पेटी / दाब पथ (Pressure Belts) — विस्तृत व्याख्या
परिचय :
पृथ्वी के वायुमंडल में वायु दाब का वितरण समान नहीं है। विभिन्न अक्षांशों पर सूर्य के ताप के प्रभाव, पृथ्वी के घूर्णन तथा भू-आकृति के कारण वायुदाब में अंतर पाया जाता है।
इन वायुदाबों के समानांतर क्षेत्रों को दाब पथ (Pressure Belts) कहा जाता है।
ये पथ लगभग अक्षांशीय दिशा में पृथ्वी के चारों ओर फैले होते हैं।
दाब पथों के प्रकार :
पृथ्वी पर कुल सात मुख्य दाब पथ माने जाते हैं —
प्रत्येक गोलार्ध में 4 और दोनों में मिलाकर कुल 7 दाब पट्टियाँ होती हैंl
क्रम दाब पथ का नाम अक्षांश स्थिति दाब का प्रकार
1 विषुवतीय निम्न दाब पथ (Equatorial Low Pressure Belt) 0° से 5°–10° अक्षांशों के बीच निम्न दाब
2 उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पथ (Sub-Tropical High Pressure Belt) लगभग 25°–35° उत्तर व दक्षिण उच्च दाब
3 उपध्रुवीय निम्न दाब पथ (Sub-Polar Low Pressure Belt) लगभग 55°–65° उत्तर व दक्षिण निम्न दाब
4 ध्रुवीय उच्च दाब पथ (Polar High Pressure Belt) 90° उत्तर व दक्षिण उच्च दाब
1. विषुवतीय निम्न दाब पथ (Equatorial Low Pressure Belt)
यह पथ भूमध्य रेखा (Equator) के चारों ओर 5° से 10° अक्षांशों के बीच स्थित है।
यहाँ सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिससे अत्यधिक ताप होता है।
तापमान अधिक होने से वायु ऊपर उठती है और सतह पर निम्न दाब बनता है।
यह क्षेत्र डोल्ड्रम्स (Doldrums) कहलाता है, जहाँ हवाएँ शांत रहती हैं।
विशेषताएँ :
वर्षभर तापमान ऊँचा रहता है।
भारी वर्षा और आर्द्रता।
उष्णकटिबंधीय वर्षावन पाए जाते हैं।
2. उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब पथ (Sub-Tropical High Pressure Belt)
यह पथ लगभग 25° से 35° अक्षांश पर दोनों गोलार्धों में स्थित है।
भूमध्य क्षेत्र से ऊपर उठी गर्म वायु ऊँचाई पर जाकर ठंडी होकर नीचे उतरती है।
नीचे उतरने से यहाँ उच्च दाब बनता है।
विशेषताएँ :
शुष्क वायु का क्षेत्र।
यहाँ से व्यापारिक पवन (Trade Winds) और पश्चिमी पवन (Westerlies) उत्पन्न होती हैं।
विश्व के प्रमुख मरुस्थल जैसे सहारा, कालाहारी, अरब, थार, ऑस्ट्रेलियाई मरुस्थल आदि इसी क्षेत्र में पाए जाते हैं।
3. उपध्रुवीय निम्न दाब पथ (Sub-Polar Low Pressure Belt)
यह पथ 55°–65° अक्षांशों के बीच पाया जाता है।
यहाँ उपोष्णकटिबंधीय उच्च दाब क्षेत्र से आने वाली गर्म पवनें और ध्रुवीय उच्च दाब क्षेत्र से आने वाली ठंडी पवनें मिलती हैं।
इन दोनों वायु समूहों के मिलने से सामने (Front) बनता है जिससे अस्थिरता और निम्न दाब बनता हैl
विशेषताएँ :
वर्षभर आंधी-तूफान और वर्षा होती है।
यह क्षेत्र समशीतोष्ण चक्रवातों (Temperate Cyclones) के निर्माण का केंद्र है।
4. ध्रुवीय उच्च दाब पथ (Polar High Pressure Belt)
यह पथ 90° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों पर स्थित है।
यहाँ अत्यधिक ठंड के कारण वायु सघन और भारी हो जाती है।
इस कारण यहाँ उच्च दाब बनता है और वायु नीचे उतरती है।
यह वायु बाहर की ओर बहती है जिसे ध्रुवीय पूर्वी पवनें (Polar Easterlies) कहा जाता है।
दाब पथों में परिवर्तन (Shifting of Pressure Belts)
सूर्य की स्थिति के साथ दाब पथ उत्तर-दक्षिण दिशा में खिसकते रहते हैं।
जब सूर्य उत्तरी गोलार्ध में होता है (ग्रीष्म ऋतु), तो सभी दाब पथ लगभग 5°–10° उत्तर खिसक जाते हैं।
जब सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है (शीत ऋतु), तो दाब पथ दक्षिण दिशा में खिसक जाते हैं।
इस परिवर्तन से मानसून जैसी मौसमी पवन प्रणालियाँ बनती हैं।
दाब पथों का महत्व :
1. विश्व की मुख्य पवन प्रणालियाँ इन्हीं पर आधारित हैं।
2. जलवायु क्षेत्रों का निर्धारण इन दाब पथों से होता है।
3. वर्षा वितरण, मरुस्थल, तथा वनस्पति क्षेत्रों की स्थिति पर इनका सीधा प्रभाव है।
4. समुद्री मार्गों और वायुमंडलीय परिसंचरण (Atmospheric Circulation) को समझने के लिए ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
सारांश तालिका :
दाब पथ अक्षांशीय सीमा दाब का प्रकार प्रमुख विशेषताएँ
विषुवतीय दाब पथ 0°–10° निम्न दाब अधिक ताप, वर्षा, डोल्ड्रम्स
उपोष्णकटिबंधीय दाब पथ 25°–35° उच्च दाब शुष्क क्षेत्र, मरुस्थल
उपध्रुवीय दाब पथ 55°–65° निम्न दाब अस्थिर मौसम, चक्रवात
ध्रुवीय दाब पथ 90° उच्च दाब ठंड, शुष्कता

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