राजस्थान का अरावली पर्वतीय प्रदेश
(Aravalli Mountain Region of Rajasthan)
1. परिचय
अरावली पर्वत श्रेणी राजस्थान का सबसे प्रमुख एवं प्राचीन भौतिक प्रदेश है। यह भारत की अत्यंत प्राचीन वलित पर्वत श्रेणियों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति प्री-कैंब्रियन युग में मानी जाती है। यह श्रेणी राजस्थान को दो भौगोलिक भागों—पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश और पूर्वी उपजाऊ मैदानों—में विभाजित करती है।
2. विस्तार (Extent)
अरावली पर्वतमाला का कुल विस्तार लगभग 692 किमी है।
यह गुजरात के पालनपुर से प्रारंभ होकर दिल्ली तक फैली हुई है।
राजस्थान में इसकी लंबाई लगभग 550 किमी है।
यह दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा में फैली है।
3. संरचना एवं भूगर्भिक स्वरूप
अरावली पर्वत वलित पर्वत हैं, जो अत्यधिक अपरदन के कारण अब खंडित एवं नीची पहाड़ियों के रूप में दिखाई देते हैं।
प्रमुख शैलें:
ग्रेनाइट
नीस
शिस्ट
क्वार्टजाइट
इस प्रदेश में खनिज संपदा अत्यधिक पाई जाती है।
4. अरावली पर्वतीय प्रदेश के उपविभाग
अरावली पर्वतीय प्रदेश को सामान्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है:
(क) उत्तर-पूर्वी अरावली प्रदेश
यह भाग अपेक्षाकृत नीचा एवं चौड़ा है।
प्रमुख जिले:
अलवर
जयपुर
दौसा
भरतपुर
यहाँ पहाड़ियाँ अधिक क्षीण अवस्था में हैं।
कृषि एवं मानव बसावट अपेक्षाकृत अधिक है।
(ख) दक्षिण-पश्चिमी अरावली प्रदेश
यह भाग उच्च, सघन एवं बीहड़ है।
प्रमुख जिले:
उदयपुर
राजसमंद
सिरोही
डूंगरपुर
बांसवाड़ा
यहाँ सबसे ऊँचा शिखर गुरु शिखर (1722 मीटर) स्थित है (माउंट आबू, सिरोही)।
वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है।
5. प्रमुख पर्वत शिखर
शिखर
ऊँचाई (मीटर)
जिला
गुरु शिखर
1722
सिरोही
सेर पहाड़
1597
उदयपुर
दिलवाड़ा
1442
सिरोही
कुम्भलगढ़
1224
राजसमंद
6. जल प्रवाह पर प्रभाव
अरावली पर्वत श्रेणी राजस्थान के जल विभाजक (Watershed) के रूप में कार्य करती है।
पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ:
बनास
चंबल
कालीसिंध
पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ:
लूनी
सुकड़ी
जोजरी
7. जलवायु पर प्रभाव
अरावली पर्वत श्रेणी मानसून पवनों को रोकने में असफल रहती है।
इसके कारण पश्चिमी राजस्थान में अल्प वर्षा होती है।
दक्षिणी अरावली क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है।
8. मृदा एवं वनस्पति
मृदा:
लाल मृदा
भूरी वन मृदा
पर्वतीय मृदा
वनस्पति:
सागवान
खैर
ढाक
बांस
मिश्रित पर्णपाती वन
9. खनिज संसाधन
अरावली प्रदेश राजस्थान का खनिज भंडार है।
प्रमुख खनिज:
तांबा – खेतड़ी
जस्ता – जावर
सीसा
संगमरमर – मकराना
फॉस्फोराइट
10. कृषि एवं मानव जीवन
कृषि वर्षा पर निर्भर
सीढ़ीनुमा खेती का प्रचलन
जनजातीय जनसंख्या (भील, गरासिया) अधिक
प्रमुख फसलें:
मक्का
ज्वार
बाजरा
11. आर्थिक महत्व
खनन उद्योग का विकास
पर्यटन (माउंट आबू, कुम्भलगढ़)
वन आधारित उद्योग
जल संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन में सहायक
12. निष्कर्ष
अरावली पर्वतीय प्रदेश राजस्थान की भौगोलिक, जलवायवीय एवं आर्थिक संरचना में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह प्रदेश न केवल प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, बल्कि राज्य के पर्यावरणीय संतुलन एवं सांस्कृतिक विविधता का भी आधार है।
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